Skip to main content

About Me


Hello Friends,
RISHIKESH KUMAR

I am a 25 year old Website Developer, working in a well establish private sector company in  New Delhi. I am from Aurangabad district of Bihar. I belong to a very simple, well-cultured "Bhumihar Bramhan" family. I can never forget the hardships and sacrifices undertaken by my parents to bring up their children. I will always be thankful to them for making me what "I am".

Being born in the rural area of Aurangabad/Obra, I have done most of my schooling from my village school and have completed my B.C.A (Computer Science) from S.N. Sinha College, Aurangabad, that a legal part of Magadh University (Bodh Gaya) My interests in software technology pursued me to undertake Masters in Computer Application and pursuing MCA “Master or Computer Application”  form SMU : www.smude.edu.in

to know more contact me at direct line - 09015443951
e-mail me at - rishi_kmr@yahoo.com  ; rksharma4it@gmail.com, 
Website : https://mr-rishi.blogspot.in

Popular posts from this blog

'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

ग़रीबी (Poverty)

जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है ! न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है !! झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं ! सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है !! फ़र्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में ! अमीरी रोती है और ग़रीबी मुस्कुराती है !! माँ  ! मुझे चाँद नही एक रोटी चाहिऐ ! बिटिया ग़रीब की रह - रहकर बुदबुदाती है !! फुटपाथ सो गई थककर मेहनत  कर  के   ! इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है !!

आधुनिक इंसान

खुशियाँ कम और          अरमान बहुत हैं । जिसे भी देखो,          परेशान बहुत है ।। करीब से देखा तो,       निकला रेत का घर । मगर दूर से इसकी,                शान बहुत है ।। कहते हैं सच क...