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एक ट्रेडर की ज़िंदगी

  एक ट्रेडर की ज़िंदगी: सिर्फ़ चार्ट और मुनाफ़े की कहानी नहीं जब भी लोग "ट्रेडर" शब्द सुनते हैं, तो उनके दिमाग में सबसे पहले पैसा आता है। उन्हें लगता है कि ट्रेडर दिनभर लैपटॉप के सामने बैठा रहता है, कुछ बटन दबाता है और लाखों रुपये कमा लेता है। सोशल मीडिया ने भी ट्रेडिंग की यही तस्वीर बना दी है—लक्ज़री कारें, महंगी घड़ियाँ, विदेशी यात्राएँ और हर दिन बड़े-बड़े प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। एक ट्रेडर की ज़िंदगी सिर्फ़ पैसे कमाने की कहानी नहीं होती। यह खुद को समझने, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने, धैर्य सीखने और हर दिन कुछ नया सीखने की यात्रा होती है। मार्केट सिर्फ़ पैसा कमाने की जगह नहीं है, बल्कि यह इंसान को जीवन के सबसे बड़े सबक सिखाने वाला शिक्षक भी है। शुरुआत सपनों से होती है... लगभग हर ट्रेडर एक सपना लेकर मार्केट में आता है। कोई आर्थिक आज़ादी चाहता है, कोई नौकरी से छुटकारा पाना चाहता है, तो कोई जल्दी अमीर बनने का सपना देखता है। शुरुआत में आत्मविश्वास बहुत होता है। लगता है कि कुछ महीनों में सब समझ आ जाएगा। लेकिन जैसे ही मार्केट अपनी असली चाल दिखाता...
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Most Talented man i meet ever

It's about my self-realization from my past professional career, which I realized over one decade. After this journey, I gained many things, learned many lessons, found many opportunities, and also lost many things... I don't know whether I am lucky or unlucky, but it was really an interesting journey. It was the time when I started working as a Policy Adviser (Agent) with Sahara India Parivar. It was my first job. The income was not good, but it was interesting to work in the public domain. From that time until now, I have worked with almost five organizations and got connected with more than 450 people, directly or indirectly. I observed people—whether they were my bosses, co-workers, partners, or many other seniors and leaders. It's my habit to observe everyone. I really don't want to explain about everyone, but I have to say that many of them became my bosses just because they belonged to financially strong families or had a lot of money. They never wanted to unders...

‌खामियां बेहिसाब

कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! मैं आसमाँ से उतरा परिंदा नहीं, खामियां मेरे अंदर बहुत है, गिनतियाँ करियेगा तो कम पड़ जाएगी उंगलिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! सुना था इंसान मिट्टी का पुतला है, पता न कब बिखर जाउ, इसलिए सायद हो जाती होगी गुस्ताखियां, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! तिनका भी नही हिल सकता बिन मर्जी तेरी, संभालो उशे जिसकी आदत बन गई गलतिया, मेरे रब ये सब बेबसी का सबब तो नही, अच्छे बुरे लफ्ज बनके निकलती मेरी गलतिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! एक नाव ऐसा जिसका कोई साहिल नही, सूखे रेत में डगमगाना कही लाजमी तो नही, एक राह ऐसा जिसका कोई किनारा नही, एक जान ऐसी जिसका कोई सहारा नही, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! उसकी फितरत बुरी नही ना करतूत बुरी, कभी कभी लड़खड़ाना हो जाती है मजबूरिया, नादान परिंदा है वो , नादान परिंदा है वो, कमसे कम आप तो समझो मेरी कमजोरिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! 21 Dec, 2018 , 6,40 am DHIK H

आधुनिक इंसान

खुशियाँ कम और          अरमान बहुत हैं । जिसे भी देखो,          परेशान बहुत है ।। करीब से देखा तो,       निकला रेत का घर । मगर दूर से इसकी,                शान बहुत है ।। कहते हैं सच क...

Never be alone in bad times

There are times when we are faced with illnesses, disorders, disabilities, Unemployment and some type of tragedy that caus es us to lose contact with ourselves and the society in which we live. Our happiness begins to fade and our heart begins to grow heavy... It's my personal experience. This affects the way we think, live, feel and the way we look at life. None of us can be happy all the time. During times of tragedy, it is natural and even beneficial, So don't hold unhappy, anger or any negative emotion that takes your control.

महापर्व छठ पूजा

उदयमान सूर्य के अर्घ्य के साथ ही संपन्न हो गया आस्था का महापर्व छठ पूजा उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही तीन दिवसीय छठ पर्व शुक्रवार की सुबह संपन्न हो गया. इससे पहले छठ पूजा के दूसरे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. !!भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए शुक्रवार की शाम से ही घाटों पर श्रद्धालु जमे रहे. आस्था के महापर्व छठ से ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं हो सकता.        यह महापर्व है और इस पर्व के दौरान आत्मानुशासन देखने को मिलता है. हर व्यक्ति स्वच्छता पर नजर रखता है.जिस तरह का आत्मानुशासन छठ पर्व के अवसर पर देखने को मिलता है, मेरी समझ से यह प्रकृति और सूर्य की पूजा है  इससे ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं है. जय छठी मईया 🙏🏽🙏🏽🙏🏽

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