Skip to main content

Daily Updates

Two people make me very confused first is RozannaLeoGregory 2nd Mr' S.Sharma....  very cunning people.
----------------
Breaking the fourth wall...Mission Junun  >>>>>>>>>>>>
---------------------------------------------
I devoted my precious years/times to my company but my company made me priceless...   (:
----------------------------------------------------

जब कभी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है !
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है!!
----------------------------------------------
किए हैं हाथ दो-दो वक़्त का मारा नहीं हूँ मैं ।
न जिससे स्वर कोई थिरके वो इकतारा नहीं हूँ मैं ॥
अगर मिल ही नहीं पाई है मुझको जीत तो क्या है,
अभी भी लड़ रहा हूँ आज तक हारा नहीं हूँ मैं ॥
-----------------------------------------------

जिंदगी भर की मुहब्बत, जिंदगी भर के गिले, अब न कुछ सुनने को बाकी है, न कहने के लिए।
जाने वाला, यूं चला जाएगा, ये सोचा न था, ऐ खुदा दे सब्र, इस सदमे को सहने के लिए।
-------------------------------------------------
शख्सियत पुरनूर तेरी जब भी याद आएगी,
आंख से दरिया छलक आएंगे बहने के लिए।
-------------------------------------------------
There is a phrase “behind every success man existence of one woman” if I will become by the mercy of lord “Of course she would be my mother”.
some  time i realize that every mind has limit power and lots of dreams, so don’t take simultaneously work pressure do first of all which is necessary finish them and go ahead.
----------------------------------------------------

Comments

KARAMAYOGI *** said…
"फुर्सत मिले तो रखना कदम कभी मेरी दिल की बस्ती में"।।
"हैरान रह जाओगे मेरे दिल में अपना मुकाम देख कर"।।

Popular posts from this blog

'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

Most Talented man i meet ever

It's about my self-realization from my past professional career, which I realized over one decade. After this journey, I gained many things, learned many lessons, found many opportunities, and also lost many things... I don't know whether I am lucky or unlucky, but it was really an interesting journey. It was the time when I started working as a Policy Adviser (Agent) with Sahara India Parivar. It was my first job. The income was not good, but it was interesting to work in the public domain. From that time until now, I have worked with almost five organizations and got connected with more than 450 people, directly or indirectly. I observed people—whether they were my bosses, co-workers, partners, or many other seniors and leaders. It's my habit to observe everyone. I really don't want to explain about everyone, but I have to say that many of them became my bosses just because they belonged to financially strong families or had a lot of money. They never wanted to unders...

‌खामियां बेहिसाब

कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! मैं आसमाँ से उतरा परिंदा नहीं, खामियां मेरे अंदर बहुत है, गिनतियाँ करियेगा तो कम पड़ जाएगी उंगलिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! सुना था इंसान मिट्टी का पुतला है, पता न कब बिखर जाउ, इसलिए सायद हो जाती होगी गुस्ताखियां, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! तिनका भी नही हिल सकता बिन मर्जी तेरी, संभालो उशे जिसकी आदत बन गई गलतिया, मेरे रब ये सब बेबसी का सबब तो नही, अच्छे बुरे लफ्ज बनके निकलती मेरी गलतिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! एक नाव ऐसा जिसका कोई साहिल नही, सूखे रेत में डगमगाना कही लाजमी तो नही, एक राह ऐसा जिसका कोई किनारा नही, एक जान ऐसी जिसका कोई सहारा नही, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! उसकी फितरत बुरी नही ना करतूत बुरी, कभी कभी लड़खड़ाना हो जाती है मजबूरिया, नादान परिंदा है वो , नादान परिंदा है वो, कमसे कम आप तो समझो मेरी कमजोरिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! 21 Dec, 2018 , 6,40 am DHIK H