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Rishikesh Kumar
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'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

‌खामियां बेहिसाब

कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! मैं आसमाँ से उतरा परिंदा नहीं, खामियां मेरे अंदर बहुत है, गिनतियाँ करियेगा तो कम पड़ जाएगी उंगलिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! सुना था इंसान मिट्टी का पुतला है, पता न कब बिखर जाउ, इसलिए सायद हो जाती होगी गुस्ताखियां, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! तिनका भी नही हिल सकता बिन मर्जी तेरी, संभालो उशे जिसकी आदत बन गई गलतिया, मेरे रब ये सब बेबसी का सबब तो नही, अच्छे बुरे लफ्ज बनके निकलती मेरी गलतिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! एक नाव ऐसा जिसका कोई साहिल नही, सूखे रेत में डगमगाना कही लाजमी तो नही, एक राह ऐसा जिसका कोई किनारा नही, एक जान ऐसी जिसका कोई सहारा नही, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! उसकी फितरत बुरी नही ना करतूत बुरी, कभी कभी लड़खड़ाना हो जाती है मजबूरिया, नादान परिंदा है वो , नादान परिंदा है वो, कमसे कम आप तो समझो मेरी कमजोरिया, कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !! 21 Dec, 2018 , 6,40 am DHIK H

Love at first sight

तुझे देखा जब मे पहली बार....  होठो  पे कोई  लब्ज नही बस मेरे आँखो के प्याले छलकने लगे.....  आख़िर ये क्या था, मैं जो समझ ना सका....  सायद तुम समझ चुकी हो तो बता दो ना.... तुझे देखा जब मैं  पहली बार.... साँसे रुक सी गई.दिल थम सा गया.. ये जिंदगी की कशमकस मे, मैं तो बहुत कुछ भूल चुका हू....  मगर तुम्हे तो याद होगा आख़िर हमारा पुराना रिस्ता क्या है,  सायद तुम समझ चुकी हो तो बता दो ना.... जय श्री हरी. .    15 Sept, 2016, 12.18 AM