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‌खामियां बेहिसाब

कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!
मैं आसमाँ से उतरा परिंदा नहीं,
खामियां मेरे अंदर बहुत है,
गिनतियाँ करियेगा तो कम पड़ जाएगी उंगलिया,
कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!
सुना था इंसान मिट्टी का पुतला है,
पता न कब बिखर जाउ,
इसलिए सायद हो जाती होगी गुस्ताखियां,
कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!
तिनका भी नही हिल सकता बिन मर्जी तेरी,
संभालो उशे जिसकी आदत बन गई गलतिया,
मेरे रब ये सब बेबसी का सबब तो नही,
अच्छे बुरे लफ्ज बनके निकलती मेरी गलतिया,
कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!
एक नाव ऐसा जिसका कोई साहिल नही,
सूखे रेत में डगमगाना कही लाजमी तो नही,
एक राह ऐसा जिसका कोई किनारा नही,
एक जान ऐसी जिसका कोई सहारा नही,
कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!
उसकी फितरत बुरी नही ना करतूत बुरी,
कभी कभी लड़खड़ाना हो जाती है मजबूरिया,
नादान परिंदा है वो , नादान परिंदा है वो,
कमसे कम आप तो समझो मेरी कमजोरिया,
कही हद से जादा तो नही मेरी गलतिया !!

21 Dec, 2018, 6,40 am
DHIK H

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