Skip to main content

अघोषित आपातकाल?

कल भारत की शाब्दिक ६५ वा स्वतंत्रता दिवस मनाया गया ...... बड़ी -बड़ी सफलताये लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने गिनाई ,,,बड़े- बड़े स्वतंत्र भारत की उपलब्धियों के दावे किये गये लोकतंत्र की सफलता गिनाईऔर ८ वी बार लाल किले पर झंडा फहरा कर स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपना नाम लिखा लिया लोकप्रिय प्रधानमंत्री के तौर पर............. पर क्या ...वे वा...स्तविक रूप से लोकप्रिय प्रधानमंत्री है ????क्या हम स्वतंत्र भारत में जी रहे है ???

जबकि लोकपाल बिल को लेकर जब अन्ना ने अनशन करनेकी ठानी तो पुलिसने अन्ना के अनशनको कुल मिलाकर २२ शर्तो के आधीन बाँध दिया कि जिनके अनुसार आन्दोलन हो,,,पर शर्तो के आंदोलनकारियो नामंजूर करने पर ,,,, सरकार की और से आपत्तिजनक रवैया आने लगा और फिर रात से ही गिरफ्तारियां शुरू हो गयी औरसुबह 10 बजे अन्ना और उनके साथियो को पुलिस ने जबरन गिरफ्तार कर लिया,,,,,,, क्यों ????????

क्या यह अघोषित आपात काल की स्थिति नहीं है क्या यह स्वतंत्र भारत है?? क्या हम स्वतंत्र है??,जबकि न तो विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता , न शांति पूर्वक आन्दोलन व् प्रदर्शन की स्वंतंत्रता ????????

औरवह भी तब,, जब स्वतंत्र भारत का संविधान हमें मौलिक अधिकारों में विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता , शान्ति पूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता देता है क्या यह संवेधान की अवहेलना नहीं है?????

क्या यह अघोषित आपातकाल नहीं है ?????  
     
                                    
RISHIKESH KR SHARMA.

Comments

Popular posts from this blog

'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

ग़रीबी (Poverty)

जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है ! न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है !! झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं ! सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है !! फ़र्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में ! अमीरी रोती है और ग़रीबी मुस्कुराती है !! माँ  ! मुझे चाँद नही एक रोटी चाहिऐ ! बिटिया ग़रीब की रह - रहकर बुदबुदाती है !! फुटपाथ सो गई थककर मेहनत  कर  के   ! इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है !!

महापर्व छठ पूजा

उदयमान सूर्य के अर्घ्य के साथ ही संपन्न हो गया आस्था का महापर्व छठ पूजा उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही तीन दिवसीय छठ पर्व शुक्रवार की सुबह संपन्न हो गया. इससे पहले छठ पूजा के दूसरे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. !!भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए शुक्रवार की शाम से ही घाटों पर श्रद्धालु जमे रहे. आस्था के महापर्व छठ से ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं हो सकता.        यह महापर्व है और इस पर्व के दौरान आत्मानुशासन देखने को मिलता है. हर व्यक्ति स्वच्छता पर नजर रखता है.जिस तरह का आत्मानुशासन छठ पर्व के अवसर पर देखने को मिलता है, मेरी समझ से यह प्रकृति और सूर्य की पूजा है  इससे ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं है. जय छठी मईया 🙏🏽🙏🏽🙏🏽