Skip to main content

भारत की 15वीं जनगणना

भारत की 15वीं जनगणना के पहले और दूसरे चरण के प्रारंभिक आंकड़े गुरुवार को दिल्ली में जारी किए गए.
दिल्ली में भारत के जनगणना आयुक्त सी चंद्रमौली ने बताया कि प्रारंभिक आंकड़ो के अनुसार भारत की मौजूदा आबादी एक अरब 21 करोड़ है. इनमें 62 करोड़ पुरुष और 58 करोड़ महिलाएं हैं.
दशक की बढ़ोतरी का आंकड़ा ब्राज़ील की आबादी से थोड़ा ही कम है. यानी दस साल में भारत की आबादी में एक ब्राज़ील जुड़ गया है.

भारत की 15वीं जनगणना

  • कुल आबादी 121 करोड़
  • कुल 62 करोड़ पुरुष और 58करोड़ महिलाएं
  • गत दस वर्षों में भारत की जनसंख्या की विकास दर में 17.6 प्रतिशत बढ़ोतरी
  • कुल जनसंख्या में 18 करोड़ की इजाफ़ा हुआ है.
  • पिछले दस वर्षों में लिंगानुपात 933से बढ़कर 940 हो गया, ये लिंगानुपात वर्ष 1961 के बाद सर्वाधिक है.
  • हरियाणा के झज्जर में लिंगानुपात सबसे कम 774 प्रति हज़ार
  • जनसंख्या के आधार उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य
  • उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश आते हैं
  • जनसंख्या के आधार पर महाराष्ट्र का ठाणे सबसे बड़ा ज़िला
  • पश्चिम बंगाल का उत्तर चौबीस परगना दूसरा सबसे बड़ा ज़िला
अब भारत की आबादी अमरीका, इंडोनेशिया, ब्राज़ील, पाकिस्तान, बांग्लादेश और जापान की कुल आबादी के बराबर है.
गत दस वर्षों में भारत की जनसंख्या की विकास दर में 17.6 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान कुल जनसंख्या में 18 करोड़ की इजाफ़ा हुआ है.
जनगणना आयुक्त सी चंद्रमौली ने कहा कि भारत में पिछले दस वर्षों में ब्राज़ील की कुल जनसंख्या जितनी बढ़ोतरी हुई है.
पंद्रहवी जनसंख्या के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस वर्षों में लिंगानुपात 933 से बढ़कर 940 हो गया है. ये लिंगानुपात वर्ष 1961 के बाद सर्वाधिक है.
आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के झज्जर में लिंगानुपात सबसे कम 774 है.
जनसंख्या के आधार उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है. उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश आते हैं.
जनसंख्या के आधार पर अब भारत का सबसे बड़ा ज़िला महाराष्ट्र का ठाणे है जबकि पश्चिम बंगाल का उत्तर चौबीस परगना दूसरा सबसे बड़ा ज़िला है.

Comments

Popular posts from this blog

'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

ग़रीबी (Poverty)

जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है ! न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है !! झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं ! सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है !! फ़र्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में ! अमीरी रोती है और ग़रीबी मुस्कुराती है !! माँ  ! मुझे चाँद नही एक रोटी चाहिऐ ! बिटिया ग़रीब की रह - रहकर बुदबुदाती है !! फुटपाथ सो गई थककर मेहनत  कर  के   ! इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है !!

आधुनिक इंसान

खुशियाँ कम और          अरमान बहुत हैं । जिसे भी देखो,          परेशान बहुत है ।। करीब से देखा तो,       निकला रेत का घर । मगर दूर से इसकी,                शान बहुत है ।। कहते हैं सच क...