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*** भारत माँ के वीर सपूत ***



Saans Hai Jab Talak Na Rukenge Kadam.

  Chal Pade Hain To Manzil Ko Pa Jayenge... 

Jaan Pyaari Nahin Hai Watan Se Hume...

       Marte Marte Sabhi Ko Bata Jaayenge.............

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'यह दिल्‍ली है मेरी जान...'

  दिल्ली: जज़्बे, जुनून और मेहमाननवाज़ी की मिसाल दिल्ली सिर्फ़ दिलवालों की ही नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों और असंभव को संभव बना देने का जुनून रखने वालों की भी है। कॉमनवेल्थ खेलों के भव्य आगाज़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली सिर उठाकर खड़ी है और पूरे जोशो-खरोश के साथ अपने हर मेहमान का स्वागत कर रही है।  कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार आयोजन यह दर्शाता है कि भारत अगर चाहे, तो विश्वस्तर का कोई भी आयोजन बख़ूबी कर सकता है। 7 हज़ार से अधिक खिलाड़ियों और अधिकारियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन को दिल्ली ने जिस भव्यता से किया है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कई लोग इसे भारत की आर्थिक ताक़त का प्रतीक भी मान रहे हैं। बीते महीनों में दिल्लीवासियों और मीडिया ने आयोजन की तमाम खामियों को उजागर किया था। लेकिन आज, जिस स्तर पर खेलों का संचालन हो रहा है, वह इस बात की मिसाल है कि जब कोई बड़ा आयोजन होता है, तो हर कोई मिलकर उसे सफल बनाता है। चाहे बात हो मेट्रो की, स्टेडियमों की, खेलगांव की या बुनियादी सुविधाओं की—दिल्ली पूरी तरह बदली-बदली नज़र आ रही है। और हर कोई कह उठा है:  "ये दिल्ली है मेरी ज...

ग़रीबी (Poverty)

जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है ! न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है !! झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं ! सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है !! फ़र्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में ! अमीरी रोती है और ग़रीबी मुस्कुराती है !! माँ  ! मुझे चाँद नही एक रोटी चाहिऐ ! बिटिया ग़रीब की रह - रहकर बुदबुदाती है !! फुटपाथ सो गई थककर मेहनत  कर  के   ! इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है !!

महापर्व छठ पूजा

उदयमान सूर्य के अर्घ्य के साथ ही संपन्न हो गया आस्था का महापर्व छठ पूजा उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही तीन दिवसीय छठ पर्व शुक्रवार की सुबह संपन्न हो गया. इससे पहले छठ पूजा के दूसरे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. !!भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए शुक्रवार की शाम से ही घाटों पर श्रद्धालु जमे रहे. आस्था के महापर्व छठ से ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं हो सकता.        यह महापर्व है और इस पर्व के दौरान आत्मानुशासन देखने को मिलता है. हर व्यक्ति स्वच्छता पर नजर रखता है.जिस तरह का आत्मानुशासन छठ पर्व के अवसर पर देखने को मिलता है, मेरी समझ से यह प्रकृति और सूर्य की पूजा है  इससे ज्यादा जीवंत और प्रकृति के प्रति विश्वास का कोई दूसरा पर्व नहीं है. जय छठी मईया 🙏🏽🙏🏽🙏🏽